आने से उसके आए बहार - आनंद बक्शी
आने से उसके आए बहार
जाने से उसके जाए बहार
बड़ी मस्तानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी जिन्दगानी है, मेरी मेहबूबा
गुनगुनाए ऐसे जैसे बजते हो घुंगरु कहींपे
आके परबतों से जैसे गिरता हो झरना जमीं पे
झरनों की मौज है वो, मौजों की रवानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी जिन्दगानी है, मेरी मेहबूबा
बन सँवर के निकले, आए सावन का जब-जब महीना
हर कोई ये समझे, होगी वो कोई चंचल हसीना
पूछो तो कौन है वो, रुत ये सुहानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी जिन्दगानी है, मेरी मेहबूबा
इस घटा को मै तो उसकी आँखों का काजल कहूँगा
इस हवा को मै तो उसका लहराता आँचल कहूँगा
कलीयों का बचपन है, फूलों की जवानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी जिन्दगानी है, मेरी मेहबूबा
बीत जाते है दिन, कट जाती है आँखों मे राते
हम ना जाने क्या क्या, करते रहते है आपस मे बाते
मै थोडा दीवाना, थोडीसी दीवानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी जिन्दगानी है, मेरी मेहबूबा
सामने मै सबके नाम उसका नहीं ले सकूँगा
वो शरम के मारे रुठ जाए तो मै क्या करूंगा
हुरोंकी मलिका है, परी यों की रानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी जिन्दगानी है, मेरी मेहबूबा
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